-
प्रत्येक व्यक्ति का प्रत्येक विचार, किसी भी व्यक्ति का सम्मान करता है, प्रेम की भावना के साथ, तब उसे शुद्धता प्राप्त होती है और साक्षात्कार होता है |
और प्रत्येक कण/भाव प्रत्येक कण/भाव का सम्मान करता है जब तक उसमे शुद्धता होती ह, साक्षात् होती ह | या तो स्वयं को सिद्ध होना करने की भाव से या तो तू समझे उसके मूल में परमात्मा के अंश के कारण |
यदि वह शुद्ध है तो वह प्रेम उसी तीव्रता और बल से आपके पास आता है
that is what we called Pisces.
