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जीवन मे कुछ चीजे इतने अकल्पनीय , अलोकिक होती ह कि उनकी प्रशंशा करना भी निंदा करना सा लगता ह | और एक गुरु ने कहा था कि
देवभूमि के देवता कहते हैं “हमारा आदि अनंत बड़े-बड़े ऋषि, मुनि, सिद्ध भी जानने में असमर्थ रहे, आप भी हमारी सिद्धता को सिद्ध करने में समय व्यर्थ ना करें”
क्युकी उसकी देवत्व इतने होती ह की उसके गुण्डातत्व को समझने मे हम आम जन मानस सक्षम नही |
so don’t analyse the “cause” too much rather than living in the outcome of cause and enjoying it. and make the good use out of it
there comes the मर्यादा
