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ग्रन्थ शस्त्र इंतने अद्भुत है की उनका अध्ययन न करने पर आप अपने उत्तम विचारों को प्रकट करने मई भी असमर्थ है. .. परमात्मा ही आत्मा और ग्रन्थ भी यदि कोई बिना ग्रन्थ पढ़े उनका का सूक्ष्म अर्थ समझने में समर्थ है तो वह जागरूक है …परन्तु वह अपने तक ही सीमित रह जायेगा ऑर स्वयं को व्यक्त करने म असमर्थ रहेगा. फिर एक समय के बाद आगे की यात्रा नहीं कर सकेगा इस जगत मे….
क्युकी उसके पश्च्यात आप अपने अनुसार बुद्धि गढ़ंत निर्णय लेंगे , और समाज मे भी सूयम के रचे हुए विचारो को श्रेस्ट मानकर प्रवचन करेंगे और ऐसे ऐसे पाप् हो जायेंगे कि आपके दुर्गति हो जाएगी…
