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विचार गंगा नदी की तरह है (हर किसी के नही) अगर लोगो के काम आ जाये तो उत्तम और अगर अंतत मई बाकि का लेय हो जाये तो भी कोई शौक नही भक्ति/भावनाये जल के समान ह जो जन्म जन्मांतर तक्क विद्यमान रहते ह जो उस ज्ञान को उद्भाषित करने का कारण ह जो या विलुप्त है अशुद्ध है , या प्रकट होने मे असक्षम ह |
